TOP TNF News: शनि अमावस्या

शनि अमावस्या

शनि अमावस्या, अवश्य करें ये विशिष्ट उपाय






शनि ग्रह
शनि ग्रह को न्याय के देवता का दर्जा दिया है, जो मनुष्य को उसके कर्मों के हिसाब से दंड देते हैं। जिस किसी पर भी शनि देव की दृष्टि वक्री होती है, उसके जीवन में उथल-पुथल मच जाती है। साढ़ेसाती की अवधि क दौरान शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय ना किए जाएं तो इसके कोप से बचना बहुत कठिन होता है।
जब सूर्य और चंद्रमा एक राशि में स्थित होते हैं और उस दिन अगर शनिवार पड़ जाए तो वह शनि अमावस्या कहलाती है। कल यानि 18 नवंबर, शनिवार को ग्रहों की स्थिति ऐसी ही है, यह दिन शनि देव के भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही साथ वे लोग जो शनि कोप से पीड़ित हैं वे भी कुछ विशिष्ट उपाय कर न्याय के देवता शनि को प्रसन्न कर सकते हैं।
शनि अमावस्या के दिन किए गए दान-पूजन अक्षय फल प्रदान करते हैं और जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष या कालसर्प दोष हो तो उन जातकों को इस दिन अवश्य शनि देव के लिए उपाय करने चाहिए अन्यथा यह लंबी बीमारी, संतान हीनता, संतान को भयंकर रोग, जैसी भयंकर समस्याओं का कारण बन सकता है।
जानकारों का कहना है कि शनि अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान या किसी तीर्थ स्थान के दर्शन करें। इसके अलवा शिंगनापुर के शनि मंदिर में स्नान करने के बाद गणेश पूजन, विष्णु पूजन, पीपल का पूजन करने से शुभ फल प्राप्त होता है।
पीपल पर जल और पंचामृत अर्पित कर उसे गंगा जल से स्नान कराएं। रौली से लिपटा हुआ जनेऊ अर्पण करने के बाद फूल, नैवेद्य का भोग लगाकर सम्मान प्रकट करें। इसके बाद पीपल के वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करते हुए शनि मंत्र का जाप करें और पीपल पर 7 बार कच्चा सूत बांधें।
इसके अलावा शनि देव से संबंधित अन्य उपाय भी हैं जिन्हें शनि कोप से पीड़ित जातक को कर लेना चाहिए।
सबसे पहला उपाय है ताम्रपत्र पर शनि यंत्र का निर्माण करें और पूरे विधि-विधान के साथ इसकी पूजा कर, इसे पोराण प्रतिष्ठित करें। इसके बाद आप इस ताम्रपत्र को अपने पास रखें, चाहें तो ताबीज की तरह धारण भी कर सकते हैं।
इसके अलावा घोड़े की नाल से बना छल्ला मध्यमा अंगुली में पहनने से भी शनि का प्रकोप न्यूनतम हो जाता है। इसे एक रात पहले सरसों के तेल में डुबोकर रखें और धारण करने से पहले 108 बार शनि मंत्र का जाप करें।
नीलम रत्न को भी शनि से संबंधित माना गया है। आप एक अच्छे ज्योतिष से परामर्श लेकर इसे पहन सकते हैं। इसे धारण करने से शनि देव के अशुभ प्रभाव में कमी आती है। शनि का उपरत्न नीली भी पहना जा सकता है।
शनि के प्रकोप को न्यूनतम करने के लिए शनि कवछ भी बहुत कारगर सिद्ध होता है। यह शनि यंत्र नीली और सात मुखी रुद्राक्ष या शनि यंत्र के मेल से बनता है।

DOWNLOAD Rashifal 2018 - Android Apps on Google Play


वैसे तो शनि कोप से पीड़ित या शनि की साढ़ेसाती झेल रहे व्यक्ति को नियमित तौर पर शनि का जाप करना चाहिए लेकिन शनि अमावस्या के दिन शनि मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है। एकाक्षरी मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नम: तांत्रिक बीज मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:

No comments:

Post a Comment