10 दिसंबर को करें बजरंग बली की आराधना, दूर होंगे सभी कष्ट
पौष अष्टमी को ‘हनुमान विजय अष्टमी’ के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक हनुमान जी की पूजा-अर्चना तथा ध्यान करने से मनुष्य अपने जन्म-जन्मांतर के सभी कष्ट दूर कर सकता है।
हनुमान अष्टमी
शास्त्रीय कथाओं के अनुसार रावण के दो महाबली मित्र थे – अहिरावण और महिरावण। ये दोनों ही पाताल निवासी थे। जब राम और रावण के बीच युद्ध हो रहा था तो रावण ने इनसे राम-लक्ष्मण को खत्म करने के लिए कहा। तत्पश्चात् रात्रि के समय जब राम-लक्ष्मण सुबेल पर्वत पर सो रहे थे तो ये दोनों शिला समेत उन्हें उठाकर पाताल लोक ले गए और प्रात:काल होते ही कामाक्षी मंदिर में इनकी बलि देने की तैयारी करने लगे। बुद्धिमान हनुमान इनका पीछा करते हुए वहां पहुंच गए। हनुमान को यह बात पता चली तो उन राक्षसों से युद्ध कर उनका वध किया तथा राम-रावण को कैद-मुक्त कराया। जब श्रीराम को इस प्रसंग की जानकारी हुई तो वे बेहद प्रसन्न हुए। उन्होंने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया कि यह दिन उनके विजय दिवस के रूप में मनाई जाएगी और पौष की कृष्णपक्ष-अष्टमी को जो कोई भी उनकी अराधना तथा 12 नामों का जाप करेगा उसके सभी कष्ट दूर होंगे। इस साल यानि कि वर्ष 2017 में यह 10 दिसंबर को पड़ रहा है। इसी दिन पौष मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी पड़ रही है जो रविवार है।
क्या करें
इस दिन प्रात:काल में हनुमान जी के मंदिर जाकर उनके दर्शन अवश्य करें। कोई विशेष मनोकामना हो, तो वहीं बैठकर हनुमान चालीसा और हनुमानाष्टक का पाठ करें। इसके पश्चात् हनुमान के 12 चमत्कारी नामों का पाठ करते हुए उनसे अपने कष्ट हरने तथा अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करें। हनुमान जी के वे 12 नाम इस प्रकार हैं:
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